आर्याभिविनय

001 Sham...

001 Aaryabhivinay Sham No MitrahDownload आर्याभिविनयः ग्रन्थ  परिचय महर्षि ने ‘आर्याभिविनय’ नामक लघु ग्रन्थ द्वारा ईश्वर के स्वरूप का ज्ञान कराया है। वेदों के मूल मन्त्रों का हिन्दी...

002 Agnimeele

002 Aaryabhivinay AgnimeeleDownload मूलमन्त्र स्तुति विषय अ॒ग्निमी॑ळे पु॒रोहि॑तं य॒ज्ञस्य॑ दे॒वमृ॒त्विज॑म्। होता॑रं रत्न॒धात॑मम्॥२॥ ऋ॰ १।१।१।१ व्याख्यान—हे वन्द्येश्वराग्ने!  आप ज्ञानस्वरूप  हो, आपकी मैं स्तुति करता हूँ। सब मनुष्यों  के प्रति...

003 Agnina...

003 Aaryabhivinay Agnina RayimashnavatDownload मूल प्रार्थना  अ॒ग्निना॑ र॒यिम॑श्नव॒त् पोष॑मे॒व दि॒वेदि॑वे। य॒शसं॑ वी॒रव॑त्तमम्॥३॥ऋ॰ १।१।१।३ व्याख्यान—हे महादातः, ईश्वराग्ने! आपकी कृपा से स्तुति करनेवाला मनुष्य  “रयिम्” उस विद्यादि  धन तथा सुवर्णादि  धन...

004 Agnih...

004 Aaryabhivinay Agnih PoorvebhihDownload मूल स्तुति अ॒ग्निः पूर्वे॑भि॒र्ऋषि॑भि॒रीड्यो॒ नूत॑नैरु॒त।  स दे॒वाँ एह व॑क्षति॥४॥ऋ॰ १।१।१।२ व्याख्यान—हे सब मनुष्यों के स्तुति करने योग्य ईश्वराग्ने! “पूर्वेभिः” विद्या पढ़े हुए प्राचीन “ऋषिभिः” मन्त्रार्थ देखनेवाले...

006 Yadang...

006 Aaryabhivinay Yadang DashusheDownload मूल प्रार्थना यद॒ङ्ग दा॒शुषे॒ त्वमग्ने॑ भ॒द्रं क॑रि॒ष्यसि॑। तवेत्तत् स॒त्यम॑ङ्गिरः॥६॥ऋ॰ १।१।२।१ व्याख्यान—हे “अङ्ग” मित्र! जो आपको आत्मादि  दान करता है, उसको  “भद्रम्” व्यावहारिक और पारमार्थिक सुख अवश्य ...

007 Vaayavaayaahi...

007 Aaryabhivinay Vaayavaayaahi DarshatemeDownload मूल स्तुति वाय॒वा या॑हि दर्शते॒मे सोमा॒ अर॑ङ्कृताः। तेषां॑ पाहि श्रु॒धी हव॑म्॥७॥ऋ॰ १।१।३।१ व्याख्यान—हे अनन्तबल परेश, वायो! दर्शनीय! आप अपनी कृपा से ही हमको प्राप्त...

008 Pavakaa...

008 Aaryabhivinay Pavakaa Nah SaraswatiDownload मूल प्रार्थना पा॒व॒का नः॒ सर॑स्वती॒ वाजे॑भिर्वा॒जिनी॑वती। य॒ज्ञं व॑ष्टु धि॒याव॑सुः॥८॥ऋ॰ १।१।६।४ व्याख्यान—हे वाक्पते! सर्वविद्यामय! हमको आपकी कृपा से “सरस्वती” सर्वशास्त्रविज्ञानयुक्त वाणी प्राप्त हो “वाजेभिः” तथा उत्कृष्ट...

009 Purutamam...

009 Aaryabhivinay Purutamam PurunaamDownload मूल स्तुति पु॒रू॒तमं॑ पुरू॒णामीशा॑नं॒ वार्या॑णाम्। इन्द्रं॒ सोमे॒ सचा॑ सु॒ते॥९॥ऋ॰ १।१।९।२ व्याख्यान—हे परात्पर परमात्मन्! आप “पुरूतमम्” अत्यन्तोत्तम और सर्वशत्रुविनाशक हो तथा बहुविध जगत् के पदार्थों के...

010 Tameeshanam...

010 Aaryabhivinay Tameeshanam JagatastasDownload मूल प्रार्थना तमीशा॑नं॒ जग॑तस्त॒स्थुष॒स्पतिं॑ धियंजि॒न्वमव॑से हूमहे व॒यम्। पू॒षा नो॒ यथा॒ वेद॑सा॒मस॑द् वृ॒धे र॑क्षि॒ता पा॒युरद॑ब्धः स्व॒स्तये॑॥१०॥ऋ॰ १।६।१५।५ व्याख्यान—हे सर्वाधिस्वामिन्! आप ही चर और अचर जगत्...

011 Ato...

011 Aaryabhivinay Ato Deva Avantu NoDownload मूल स्तुति अतो॑ दे॒वा अ॑वन्तु नो॒ यतो॒ विष्णु॑र्विचक्र॒मे। पृ॒थि॒व्याः स॒प्त धाम॑भिः॥११॥ऋ॰ १।२।७।१ व्याख्यान—हे “देवाः” विद्वानो! “विष्णुः” सर्वत्र व्यापक परमेश्वर ने सब जीवों को पाप...

012 Paahi...

012 Aaryabhivinay Paahi No Agne RakshasahDownload मूल प्रार्थना पा॒हि नो॑ अग्ने र॒क्षसः॑ पा॒हि धू॒र्तेररा॑व्णः। पा॒हि रीष॑त उ॒त वा॒ जिघां॑सतो॒ बृह॑द्भानो॒ यवि॑ष्ठ्य॥१२॥ऋ॰ १।३।१०।५ व्याख्यान—हे सर्वशत्रुदाहकाग्ने परमेश्वर! राक्षस, हिंसाशील, दुष्टस्वभाव...

013 Twamasya...

013 Aaryabhivinay Twamasya PaareDownload मूल स्तुति त्वम॒स्य पा॒रे रज॑सो॒ व्यो॑मनः॒ स्वभू॑त्योजा॒ अव॑से धृषन्मनः। च॒कृ॒षे भूमिं॑ प्रति॒मान॒मोज॑सो॒ऽपः स्वः॑ परि॒भूरे॒ष्या दिव॑म्॥१३॥ऋ॰ १।४।१४।२ व्याख्यान—हे परमैश्वर्यवन् परमात्मन्! आकाशलोक के पार में तथा...