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अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 15

(लङ् लकार) १. कुमारी मोहिनी का गीत समाप्त ही हुआ था कि उपस्थित लोगों ने कहा- “एक बार और” “एक बार और”।कुमार्या मोहिन्या गीतेश्वसाने संनिहिता जना भूयोऽपीति साम्रेडम् आचक्षत। २….

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 14

(लङ् लकार) १. नौकर को सारी रात जागना पड़ा कारण कि नगर में अफवाह फैल गई थी कि बाहर से चोर आए हुए हैं।नियोज्यः सर्वरात्रमवशमजागः, नगरे ह्यप्रथत प्रवादो बाह्यतश्चौराः समागता…

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 13

(लङ् लकार) १. मेले में इतनी भीड़ थी, कि दम घुटा जाता था। कई एक बच्चे और बूढ़े कुचले गए और बीसियों स्त्रियाँ बेहोश हो गईं।मेलके एतावाञ्जनसंबाधोऽभवद् यच्छ्वसितुमपि नालभ्यत। अनेके…

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 12

(लङ् लकार) १. यदि इस किले के सिपाही दो महिने और डटे रह सकते थे, तो उन्हें भोजन सामग्री क्यों न भेजी गई?अस्य दुर्गस्य योद्धारश्चेन्मासद्वयं रणेऽभिमुखं स्थातुं समर्था आसन्, तदा…

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 10

(लँङ् लकारः) १. जब माता दृष्टि से ओझल हुई, तो बच्चा बिलख बिलख कर रोने लगा।नयनविषयम् अतिक्रान्तायां मातरि शिशुः प्रमुक्तकण्ठं प्रारोदीत्। २. जब मैं स्कूल पहुँचा तो अध्यापक महोदय उपस्थिति…

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 9

(लङ् लकार) १. राम और सुग्रीव की मित्रता बढ़ गई। क्योंकि दोनों का कार्य एकदूसरे की सहायता से बनता हुआ दीखा।अमूर्च्छत्सख्यं रामसुग्रीवयोः। यतो मिथः साहाय्येन लक्षिता कार्यसिद्धिर्द्वयोः। २. रात में…

अनुवाद कला (द्वितीय अंश) अभ्यास 8

(लङ् लकार) १. जब मैं घर में प्रविष्ट हुआ तो कोई भी अन्दर न था। इससे मुझे बहुत अचम्भा हुआ।यदाहं गेहं प्रविष्टो नासीत् कोऽप्यन्तः। तेन जातं ममाश्चर्यम्। २. भारत में…

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076 अष्टाध्यायी सूत्राभ्यास 3_1_121 se 130

युग्यं च पत्रे (क्यप्, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/121) अमावस्यदन्यतरस्याम् (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/122) छन्दसि निष्टर्क्यदेवहूयप्रणीयोन्नीयोच्छिष्यमर्यस्तर्याध्वर्यखन्यखान्यदेवयज्यापृच्छ्यप्रतिषीव्यब्रह्मवाद्यभाव्यस्ताव्योप– चाय्यपृडानि (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/123) ऋहलोर्ण्यत् (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/124) ओरावश्यके (ण्यत्, धातोः, प्रत्ययः, परश्च)…

अति आत्म या एकी साधना

अति आत्म या एकी साधना (संक्षिप्त प्रारूप) लेखक : स्व.डॉ.त्रिलोकीनाथ जी क्षत्रिय स्थिरं सुखम् आसनम्।।१।। स्व आकलन।।२।। त्रि दीर्घ सम विपश्यना।।३।। दीर्घ समगति ‘‘अगाओ’’ उच्चारण।।४।। सुचालनम्।।५।। पादयोः ऊर्वोः बाहुभ्यां यशोबलम्…

077 अष्टाध्यायी सूत्राभ्यास 3_1_131 se 140

अग्नौ परिचाय्योपचाय्यसमूह्याः (ण्यत्, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/131) चित्याग्निचित्ये च (अग्नौ, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/132) ण्वुल्तृचौ (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/133) नन्दिग्रहिपचादिभ्यो ल्युणिन्यचः (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/134) इगुपधज्ञाप्रीकिरः कः (धातोः, प्रत्ययः, परश्च)…

078 अष्टाध्यायी सूत्राभ्यास 3_1_141 se 150

श्याद्व्यधास्रुसंस्र्वतीणवसावहृलिहश्लिषश्वसश्च (णः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/141) दुन्योरनुपसर्गे (णः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/142) विभाषा ग्रहः (णः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/143) गेहे कः (ग्रहः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/1/144) शिल्पिनि ष्वुन् (धातोः, प्रत्ययः,…

079 Ast 3_2_1 se 10

द्वितीयः पादः कर्मण्यण् (धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/1) ह्नावामश्च (कर्मण्यण्, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/2) आतोऽनुपसर्गे कः (कर्मणि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/3) सुपि स्थः (कः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/4) तुन्दशोकयोः परिमृजापनुदोः (कः,…

080 अष्टाध्यायी सूत्राभ्यास 3_2_11 se 20

आङि ताच्छील्ये (हरतेः, अच्, कर्मणि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/11) अर्हः (अच्, कर्मणि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/12) स्तम्बकर्णयोरमिजपोः (अच्, सुपि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/13) शमि धातोः संज्ञायाम् (अच्, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/14)…

081 अष्टाध्यायी सूत्राभ्यास 3_2_21 se 30

दिवाविभानिशाप्रभाभास्कारान्तानन्तादिबहुनान्दीकिंलिपिलिबिबलिभक्तिकर्तृचित्रक्षेत्रसंख्याजङ्घाबाह्नहर्यत्तद्धनुररुष्षु (कर्मणि, सुपि, कृञः, टः, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/21) कर्मणि भृतौ (कृञः, टः, कर्मणि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/22) न शब्दश्लोककलहगाथावैरचाटुसूत्रमन्त्रपदेषु (कृञः, टः, कर्मणि, धातोः, प्रत्ययः, परश्च) (3/2/23) स्तम्बशकृतोरिन् (कृञः, कर्मणि,…

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चूड़ाकर्म संस्कार

चूड़ाकर्म संस्कार इसका अन्य नाम मुण्डन संस्कार भी है। रोगरहित उत्तम समृद्ध ब्रह्मगुणमय आयु तथा समृद्धि-भावना के कथन के साथ शिशु के प्रथम केशों के छेदन का विधान चूडाकर्म अर्थात्…

अन्नप्राशन संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार जीवन में पहले पहल बालक को अन्न खिलाना इस संस्कार का उद्देश्य है। पारस्कर गृह्यसूत्र के अनुसार छठे माह में अन्नप्राशन संस्कार होना चाहिए। कमजोर पाचन शिशु का…

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