प्रभात बेला गीत

अमृत वेला जाग…

अमृत वेला जाग…Download प्रातःगान अमृत वेला जाग अमृत बरस रहा।छोड़ नींद का राग अमृत बरस रहा।। चार बजे के पीछे सोना, है अपने जीवन को खोना।झट बिस्तर...

जो जागत है सो पावत है…

जो जागत है सो पावत है…Download प्रातःगान उठ जाग मुसाफिर भोर भई,अब रैन कहाँ जो सोवत है?जो सोवत है सो खोवत है,जो जागत है सो पावत...

साथी सारे जगे तू न जागा…

साथी सारे जगे तू न जागा...Download प्रातःगान बेला अमृत गया, आलसी सो रहा, बन अभागा।साथी सारे जगे तू न जागा।। झोलियाँ भर रहे भाग्य वाले, लाखों पतितों...