सृष्टि

३७. सृष्टि – जो कर्त्ता की रचना से कारण द्र्य किसी संयोगविशेष से अनेक प्रकार कार्यरूप होकर वर्तमान में व्यवहार करने योग्य होती है, वह ‘सृष्टि’ कहाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *