सत्सङ्ग कुसङ्ग

१९. सत्सङ्ग कुसङ्ग – जिस करके झूठ से छूट के सत्य की ही प्राप्ति होती है, उसको ‘सत्सङ्ग’ और जिस करके पापों में जीव फँसे, उसको ‘कुसङ्ग’ कहते हैं।

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