व्यभिचारत्याग

७६. व्यभिचारत्याग – जो अपनी स्त्री के विना दूसरी स्त्री के साथ गमन करना, और अपनी स्त्री को भी ऋतुकाल के विना वीर्यदान करना, तथा अपनी स्त्री के साथ भी वीर्य का अत्यन्त नाश करना, और युवावस्था के विना विवाह करना है, यह ‘व्यभिचार’ कहाता है। उसको छोड़ देने का नाम ‘व्यभिचारत्याग’ है।

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