लौकिक सफलता का अधूरापन

10 नवम्बर

लौकिक सफलता का अधूरापन
लौकिक सफलता जीवित-अजीवित सुख साधनों को हमारे पास लाकर, हमें उनके उपभोग का अधिकारी तो बना देती है, और सिर्फ यही पाना कहलाता है। लेकिन यह सफलता दोनों के बीच की दूरियाँ मिटाकर और उन्हें हमसे जोड़कर, हमारे भौतिक अस्तित्व तथा स्वरूप का हिस्सा नहीं बना पाती। इस असम्बद्धता के कारण इन साधनों पर हमारा जो स्वामित्व बनता है, वह सम्बन्ध-विहीन व अधूरा ही रहता है।


-डॉ. राधावल्लभ

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