यज्ञ

४७. यज्ञ – जो अग्निहोत्र से ले के अश्वमेध पर्य्यन्त, वा जो शिल्प व्यवहार और पदार्थ विज्ञान जो कि जगत् के उपकार के लिए किया जाता है, उसको ‘यज्ञ’ कहते हैं।

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