मुक्ति

२९. मुक्ति – अर्थात् जिससे सब बुरे काम और जन्म मरणादि दुःखसागर से छूटकर सुखरूप परमेश्वर को प्राप्त होके सुख ही में रहना है, वह ‘मुक्ति’ कहाती है।

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