मायावी

८०. मायावी – जो छल कपट स्वार्थ में ही प्रसन्नता दम्भ अहङ्कार शठतादि दोष हैं, और जो मनुष्य इनसे युक्त हो, वह ‘मायावी’ कहाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *