प्रार्थना

२४. प्रार्थना – अपने पूर्ण पुरुषार्थ के उपरान्त उत्तम कर्मों की सिद्धि के लिये परमेश्वर वा किसी सामर्थ्यवाले मनुष्य के सहाय लेने को ‘प्रार्थना’ कहते हैं।

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