निन्दा

२३. निन्दा – जो मिथ्याज्ञान मित्याभाषण झूठ में आग्रहादि क्रिया है, जिससे कि गुण छोड़कर उनके स्थान में अपगुण लगाना होता है, वह ‘निन्दा’ कहाती है।

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