तीर्थ

२०. तीर्थ – जितने विद्याभ्यास, सुविचार, ईश्वरोपासना, धर्मानुष्ठान, सत्य का संग, ब्रह्मचर्य, जितेन्द्रयताद उत्तम कर्म हैं, वे सब ‘तीर्थ’ कहाते हैं। क्योंकि इन करके जीव दुःखसागर से तर जा सकते हैं।

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