एकमत होने का प्रकार

सत्यार्थ प्रकाश के अनमोल वचन

जो बाल्यावस्था में एक सी शिक्षा हो सत्यभाषणादि धर्म का ग्रहण और मिथ्याभाषणादि अधर्म का त्याग करें तो एकमत अवश्य हो जाएं। और दो मत अर्थात् धर्मात्मा और अधर्मात्मा सदा रहते हैं, वे तो रहें। परन्तु धर्मात्मा अधिक होने और अधर्मी न्यून होने से संसार में सुख बढ़ता है और जब अधर्मी अधिक होते हैं तब दुःख। जब सब विद्वान एक सा उपदेश करें तो एकमत होने में कुछ भी विलम्ब न हो।

-महर्षि दयानन्द सरस्वती

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