अनादि का स्वरूप

५४. अनादि का स्वरूप – जो न कभी उत्पन्न हुआ हो, जिसका कारण कोई भी न होवे, अर्थात् जो सदा से स्वयंसिद्ध हो, वह ‘अनादि’ कहाता है।

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