चूड़ाकर्म संस्कार

चूड़ाकर्म संस्कार इसका अन्य नाम मुण्डन संस्कार भी है। रोगरहित उत्तम समृद्ध ब्रह्मगुणमय आयु तथा समृद्धि-भावना के कथन के साथ शिशु के प्रथम केशों के छेदन का विधान चूडाकर्म अर्थात्…

अन्नप्राशन संस्कार

अन्नप्राशन संस्कार जीवन में पहले पहल बालक को अन्न खिलाना इस संस्कार का उद्देश्य है। पारस्कर गृह्यसूत्र के अनुसार छठे माह में अन्नप्राशन संस्कार होना चाहिए। कमजोर पाचन शिशु का…

पुंसवन संस्कार

पुंसवन संस्कार यह संस्कार गर्भावस्था के दूसरे व तीसरे माह में किया जाता है। इसका उद्देश्य गर्भस्थ शिशु को पौरुषयुक्त अर्थात् बलवान, हृष्ट-पुष्ट, निरोगी, तेजस्वी, एवं सुन्दरता के लिए किया…

गर्भाधान संस्कार

गर्भाधान संस्कार स्वस्थ सुसंस्कृत युवक एवं युवती जो आयु परिपुष्ट हों सुमन, सुचित्त होकर परिवार हेतु सन्तान प्राप्ति के उद्देश्य से इस संस्कार को करते हैं। वैदिक संस्कृति में गर्भाधान…

वैदिक सोलह संस्कार

वैदिक सोलह संस्कार भूषणभूत सम्यकीकरण को संस्कार कहते हैं। देवत्वीकरण तथा समाजीकरण के श्रेष्ठ सांचों में मानव को ढाल कर सुसंस्कृत कर देने का नाम भूषणभूत सम्यक् कृति है। अथवा…

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