प्रवाह से अनादि संसारचक्र

प्रवाह से अनादि संसारचक्र

प्रमाण :-
“सत्त्वरजस्तमसां साम्यावस्था प्रकृतिः प्रकृतेर्महान्महतोऽहंकारोऽहंकारात्पञ्चतन्मात्राण्युभयमिन्द्रियं तन्मात्रेभ्यः स्थूलभूतानि पुरुष इति पञ्चविंशतिर्गणः” (सांख्यदर्शन 1/61)

प्रमाण :-
ओ3म् शतं तेऽयुतं हायनान् द्वे युगे त्राीणि चत्वारि कृण्मः। इन्द्राणि विश्वे देवास्तेऽनु मन्यन्तां हृणीयमानाः।
(अथर्ववेद 8/2/21)
अयुत = 10, 000 (दस हजार) सैकड़े पर 2, 3, 4 लिखने पर कल्पकाल 4,32,00,00,000 वर्ष निकलता है। (संवत 2047 का 10 वां कालचक्र पृ-2)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *