आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य

कुटिल गोत्रोत्पन्न आचार्य चणक ने अपने पुत्र का नाम विष्णुगुप्त रखा था। कालान्तर में चणक आचार्य के पुत्र विष्णुगुप्त चाणक्य नाम से प्रसिद्ध हुए। इनका समय 322 या 325 वर्ष का माना जाता हैइनका जन्म मगध साम्राज्य की राजधानी पाटलीपुत्र में हुआ था। तत्कालीन मगध सम्राट धनानन्द के अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण आचार्य चणक को राजबन्दी बना लिया गया। वहीं इनकी मृत्यु हो गई। कुछ दिनों पश्चात इनके माताजी के भी देहान्त के उपरान्त विष्णुगुप्त तक्षशिला में आ गए। वहीं अर्थशास्त्र विषय का अध्ययन कर आचार्य बने। उस समय तक्षशिला विश्व का सर्वश्रेष्ठ विद्याकेन्द्र के रूप में विकसित था। यहाँ एशिया, युरोप एवं अफ्रिकी महाद्विपों से छात्र अध्ययनार्थ आया करते थे।

सिकन्दर के आक्रमण के पूर्व भारत छोटे-छोटे गणराज्यों में विभक्त था। विश्वविजेता बनने की इच्छा से सिकन्दर ने भारत पर आक्रमण किया। उस समय आचार्य चाणक्य ने सभी गणराज्यों को संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। मगध सम्राट से सिकन्दर के विरुद्ध सामरिक सहाय की याचना करने पर घमण्ड में चूर धनानन्द ने आचार्य का अपमान किया था। इसी अत्याचारी सम्राट को पदच्युत करने तक अपनी शिखा में गांठ नहीं लगाने की प्रतिज्ञा आपने की थी। नन्दवंश का विनाश कर चन्द्रगुप्त को गन्धार से लेके समस्त उत्तरापथ और दक्षिण में सिन्धुतट तक महान चक्रवर्ति राज्य का सम्राट आपने बना दिया था।

इतने बड़े साम्राज्य का महामन्त्री होने पर भी आपका रहन-सहन विरक्त साधुओं जैसा ही था। मुद्राराक्षस नाटक के एक श्लोक के अनुसार उनके जीर्ण-शीर्ण कुटियानुमा झोपड़े में एक ओर गोबर के उपलों को तोड़ने के लिए एक पत्थर रखा था दूसरी ओर शिष्यों द्वारा लाई गई कुशा (घास) का ढेर रखा था। छत पर समिधाएँ सूखने के लिए डाली गईं थीं, जिसके भार से छत झुक गई थी।

आचार्य चाणक्य कुशल राजनीतिज्ञ एवं कूटनीतिज्ञ थे। राजनीति में साम, दाम, दण्ड, भेद नीति के समर्थक थे। वे एक चतुर चिकित्सक तथा रसायनशास्त्र के ज्ञाता थे। अर्थशास्त्र में अनेक रासायनिक शस्त्रास्त्रों के निर्माण एवं प्रयोगविधि देखने को मिलती है। इन शस्त्रास्त्रों के द्वारा अग्निकाण्ड, मूर्छा, जागरण, निद्रा, आलस्य, उन्माद और भ्रमादि उत्पन्न किए जा सकते हैं।

आचार्य चाणक्य के द्वारा लिखित साहित्य में कौटलीय अर्थशास्त्र सर्वाधिक प्रसिद्ध ग्रन्थ है। इसके अलावा 2) वृद्ध चाणक्य, 3) चाणक्य नीतिशास्त्र, 4) लघुचाणक्य, 5) चाणक्य राजनीतिशास्त्र आदि ग्रन्थों की आपने रचना की है। आज भी आचार्य द्वारा लिखित ग्रन्थ कौटलीय अर्थशास्त्र राजनीति विषय की विश्वश्रेष्ठ पुस्तक है।

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