60. कृष्ण पक्ष तिथि

60 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- ‘‘निर्भय स्वागत करो मृत्यु का, मृत्यु एक विश्राम स्थल’’ विश्राम के विधान को कौन पलट सकता है ? स्वामी जी का अंतिम समय आ गया। और वे मृत्यु के स्वागत के लिए प्रातः ही से तैयार हो गए, क्षौर कर्म करा के स्नान किया शेष समय प्रभु चिंतन में लगाया।

वीर छन्द :-

कृष्ण पक्ष तिथि अमावस्या थी,

दीपावली दिन मंगलवार।

पीछे खड़ा किया लोगों को,

खोले सभी हवा के द्वार।

ध्यान लगाया परमेश्वर का,

जिसने रचा सकल संसार।

चंद्र समान तेज चेहरा पर,

मुख पर रहस्य भई मुस्कान।

जिसे देखकर गुरुदत्त जी ने,

मन के संशय दिए मिटाए।

घोर नास्तिक आस्तिक बन गया,

श्रद्धा बढ़ी प्रभु से जाए।

लीला खूब रची मेरे ईश्वर,

तेरी इच्छा पूरण होए।

अंतिम शब्द बोलकर ऋषि ने,

अपने प्राण दिए बिसराए।

वार्ता :- इस धराधाम पर रहने वाली समस्त मानव जाति ऋषि के अनगिनत उपकारों की ऋणी है। ऋषि भक्त को अपने गुरु के आदर्शों को मानते हुए संसार को वेद की ज्ञान ज्योति से प्रकाशित करना है। तभी हम ऋषि ऋण से मुक्त होंगे।

           बहुत कुछ लिखेंगे लोग ऋषि तेरी शान में।

            तुझसा फरिस्ता नहीं देखा जहान में।।                

ओ३म् शांति शांति शांतिः।।