55. ऋषि ने घर-घर अलख

55 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- वैदिक धर्म के प्रचार को स्थाई रूप देने के लिए स्वामी जी ने परोपकारिणी सभा की स्थापना की। उदयपुराधीश महाराणा सज्जनसिंह प्रधान, लाला मूलराज एम.ए. अ. कलक्टर उप-प्रधान और मंत्री श्री कविराज श्यामलदस जी मेवाड़ राज्य इसके आलावा महाराजा नाहरसिंह शाहपुराधीश, म. फतेहसिंह जी भीलवाड़ा रायबहादुर जयकृष्ण दास कलक्टर बिजनौर, राजे श्री गोपाल हरि देशमुख कौंसल गवर्नर मुंबई, राव बहादुर महादेव गोविन्द रानडे जज पूना, सर श्याम कृष्ण वर्मा प्रो. अहृक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लंदन इत्यादि। अन्य गण मान्य प्रतिष्ठित महानुभाव परोपकारिणी सभा के सदस्य थे।

राग लहरिया :-

ऋषि ने घर-घर अलख जगायौ है।

तब ज्ञान की ज्योति जगी है। ऋषि ने..

तंत्र मंत्र और जादू टौना,

दुष्ट जनों का खेल खिलौना,

खोल सब इनको भेद बतायौ है। तब ज्ञान..

पण्डे कन्या दान ले रहे है,

धन से मालामाल हो रहे

सतियों का धर्म बचायौ है। तब ज्ञान..

ऊंच-नीच और जात-पात के,

पंथ बन गए भांति-भांति के,

ऋषि ने धर्म का मर्म बतायौ है। तब ज्ञान..

पाखंडों का दमन किया है,

वेद का सूरज उदय हुआ है,

ऋषि ने आगे कदम बढ़ायौ है। तब ज्ञान..