53. मुंबई से इंदौर जाए कर

53 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- स्वामी जी के पास गुजरात, काठियावाड़ अवध और आगरा से अनेक निमंत्रण पत्र आते थे । स्वामी जी पुनः मुंबई से इंदौर के लिए प्रस्थान करते हैं ।

वीर छन्द :-

मुंबई से इंदौर जाए कर, वेद का डंका दिया बजाए।

जावर और रतलाम घूमकर, गढ़ चित्तौड़ पहुंच गए जाए।।

रामानंद ब्रह्मचारी साथ में, स्वामी आत्मानंद महाराज।

नौलखा बाग उदयपुर पहुंचे, पंडित भीमसेन के साथ।।

स्वागत कीन्हा राणा जी ने, श्री चरणों में शीष झुकाए।

गदगद कंठ भए लोगों के, पुलकित नयन हृदय हरषाए।।

मौलवी अब्दुर्रहमान ऋषि से, आया करने वाद-विवाद।

प्रश्नों का उत्तर सब पाया, दूर हुआ मन का संताप।

जन्म-मरण से मोक्षधाम तक, चर्चा में कीन्हा विश्वास।

सहजानंद एक संन्यासी, रहता स्वामी के पास।।

शिष्य बन गया स्वामी जी का, मान रहा उनका आदेश।

नगर-नगर और गांव-गांव में, करने लगा धर्म उपदेश।

मोहनलाल विष्णुलाल पंड्या, हाथ जोड़ रहे विनय सुनाए।

कब कैसे हो भला देश का ? ऋषिवर हमको दो बतलाए।।

एक धर्म इक भाषा होगी, एक भव का ही संचार।

स्वाभिमान मर्यादा जागे देश का तब होगा कल्याण।।