52. राज्य चित्तौड़ में

52 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- महाराजा सज्जन सिंह का निमंत्रण पाकर स्वामी उदयपुर जाने को तत्पर हुए।  कुछेक पंडितों और राजपुरुषों के साथ भ्रमण करने निकले। रस्ते में एक देवालय पड़ा। कुछ छोटे-छोटे बच्चे सीढियों पर खेल रहे थे। वहां स्वामी जी अपना सिर एकाएक नीचा कर लिए, फिर आगे चल पड़े। तभी पंडित लोग बोले ‘‘महाराज मूर्ति पूजा का चाहे जितना खंडन कर लो परंतु देवशक्ति के आगे तो झुकना ही पड़ता है।’’ स्वामी जी ने तुरंत वहां खेल रही चतुर्वर्षीय कन्या की ओर इशारा किया। मेरा सर तो इस मातृशक्ति के आगे झुका है। यह सुनकर सब लोग मौन हो गए।

कव्वाली गझल :-

राज्य चित्तौड़ में ऋषि ने बड़ी हलचल मचाई है।

राज पुरुषों में वैदिक धर्म की चर्चा चलाई है।

बुलावा राज्य से उन्हें इंदौर आने का।

किया पुरुषार्थ स्वामी ने अविद्या को मिटाने का।।

कूंच मुंबई को फिर कीन्हा लगन ऐसी समाई है। राज..

आगमन पर बड़ा स्वागत हुआ था शहर मुंबई में।५

वहां महाराज का आसन लगाया बालकेश्वर में।।

रानडे, अल्काट ने आकर भक्ति अपनी दिखाई है।। राज..

गौ करूणानिधि लिखकर गौरक्षा का व्रत लीन्हा।

योगविद्या के रहस्यों का मर्म सब को बता दीन्हा।

जनकधारी ने दानापुर से आ शंका जताई है। राज..

निवारण संदेह का कीन्हा मौनियर विलियम्स आए हैं।

प्रभावित ऋषि के वचनों से संदेशा साथ लाए हैं।

वेद के ज्ञान से योरोप की भी हो भलाई है। राज..

दिया उपदेश विप्रों को जरा बहार निकल जाओ।

कोल भीलों को जाकर के धर्म का तत्व समझाओ।।

इसाई बन रहे अज्ञानवश जो अपने भाई हैं। राज..