51. ऋषि ने देखो जीत लिया

51 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- स्वामी जी के हृदय में नारी जाति के उत्थान के लिए हमेशा करुणा विद्यमान रहती थी । देश के भविष्य के लिए स्त्री जाति के शिक्षण पर विशेष बल दिया करते थे। एक दिन रात्रि को स्वामी जी अचानक चिन्तित मुद्रा में इधर से उधर-चहल कदमी कर रहे थे। एक भक्त ने कहा कि ‘‘महाराज क्या तबियत ख़राब है ? अगर वेदना है तो औषधि उपचार

करूं।’’ एक लम्बी श्वास छोड़ते हुए स्वामी जी बोले मेरी वेदना की कोई औषधी नहीं। यह वेदना देश के परिश्रिमी लोगों की दुर्दशा से उत्पन्न हुई है । इसाई लोग सात समुन्द्र पार से आकर भारत की भोली-भाली जनता को इसाई बना रहे हैं । हमारे पंडित पुरोहित और महंत कुंभकरण की नींद सोते हैं । उनके कानों पर जू तक नहीं रेंगती। मैं चाहता हूं कि देश के राजाओं-महाराजाओं को सन्मार्ग पर लाकर इस आर्य जाति का सुधार करूं । स्वामी जी अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए राजस्थान की ओर कूंच करते हैं ।

                     (राजस्थान कांड)

राग धमाल :-

ऋषि ने देखो जीत लिया जग सारा।। टेक।।

उसे जीतने वाला हमने कोई नहीं निहारा। ऋषि ने..

बड़े-बड़े दिग्गज पंडित देखो शास्त्र समर में हार गए।

मुल्ला और पादरी भी ऋषिवर का लोहा मान गए।

उत्तराखंड को जीत दयानंद दक्षिण को प्रस्थान किया।

राजस्थान की समर भूमि में वेद का डंका बजा दिया।

शहर भरतपुर में जाकर के वैदिक धर्म प्रचार किया।

नगर निवासी मोहित हो गए फिर जयपुर को कूंच किया।।

जयपुर से अजमेर पहुंच गए मन में लगन लगी देखो।

सेठ फतेहमल जी के बाग में आसन जाए लगा देखो।

सुना आगमन दयानंद का घर-घर बजा नगारा। ऋषि..

पंजाब प्रान्त से लेख्ररामजी दर्शन हेतु पधारे हैं।

दश प्रश्नों का समाधान कर अन्य भी प्रश्न विचारे हैं।

अष्टाध्यायी प्रति ऋषि ने लेखराम को दीन्ही है।

गुरु-चरणों का वंदन करके तुरंत विदाई लीन्ही है।।

उधर ऋषि अजमेर छोड़कर राज्य मसूदा पंहुंच गए।

बहादुरसिंह के आग्रह से ऋषि राम उद्यान में ठहर गए।।

पादरी शूल्ब्रेड जी आकर प्रश्न पूछकर चला गया।

जैन शिरोमणि सिद्धि करण भी शास्त्रार्थ में हार गया।

तब कई जैन यों कहने लागे वैदिक धर्म हमारा। ऋषि..

रायपुर और ब्यावर में भी धूम मची थी स्वामी की।

नगर बनेड़ा की गलियों में जयजयकार थी स्वामी की।।

चक्रांकितों का मर्दन करके गढ़ चित्तौड़ पंहुंच गए हैं।

गंभीर नदि तट मंदिर में जाकर महाराज ठहर गए हैं।।

वहां लाट रिपन की राज सभा में राजा-महाराजा आए।

राज धर्म उपदेश ऋषि ने सब लोगों को बतलाए हैं।।

राज्य उदयपुर के महाराजा सज्जन सिंह पधारे हैं।

सादर न्योता दिया ऋषि को अपने राज्य सिधारे हैं।।

कवि श्यामलदास ने भक्तिभाव से वैदिक नाद उचारा। ऋषि..