44. जयपुर पहुंच गए

44 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- मेरठ की धर्म सभा ने स्वामी जी से तीन प्रश्न पूछे। पहला परंपरा से चली आ रही देवमूर्तियों की पूजा, दूसरी गंगा नदि की पवित्रता स्थान से मुक्ति की प्राप्ति, तीसरा ईश्वरावतार आदि से संदेह निवृत्ति। स्वामी जी ने प्रश्न का सर गर्भित उत्तर दिया । धर्म प्रचार करते हुए स्वामी मेरठ दिल्ली होकर जयपुर आते हैं।

चौपाई :-

जयपुर पहुंच गए बलवीरा। स्वर्ग सिधार गए रणवीरा।

तुरंत गए अजमेर रवाना। ठहरे राम प्रसाद उद्याना।

पुष्कर के मेला में आकर। धर्म प्रचार किया वहां जाकर।

स्वामी जी खंडन जब करते। रोजी गई पोप सब डरते।

कई पादरी मिलकर आए। शंका समाधान करवाए।

धनुर्वेद के ढाई पन्ने। उनसे भए ऋषि चौकन्ने।

जीवन लड़ी अधिक हो जाए। पुरा धनुर्वेद लिख जाए।

राज्य मसूदा जाए विराजे। हर्षित बहादुरसिंह महाराजे।

वेद प्रचार किया वहां जाकर। धर्माधर्म दिया समझकर।

स्वामी जी जयपुर में आए। राजा पोप सभी खिसियाए।

ठाकुर लक्ष्मण सिंह समझाए। ऋषिवर नहीं डिग पावे।

रेवाड़ी से दिल्ली आए। वहां से ज्वालापुर को धाए।

राव ओजखाँ स्वामी जी से। मिलने आते बड़े प्रेम से।

भक्ष्याभक्ष्य विषय की जाना । दीना छोड़ मांस का खाना।