32. होशियारपुर के पास

32 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- स्वामीजी बड़ौदा से फिर मुंबई पधारते हैं। वहां उनसे मिलने भगवती नाम की माई जो बचपन से वैराग्यवती हो गई थी मिलने आई। सत्यार्थ प्रकाश पढ़कर उसकी इच्छा स्वामीजी से मिलने की हुई। मुंबई शहर में आर्य समाज की स्थापना हो चुकी थी। सर्वप्रथम अट्ठाईस नियम बने थे।

दोहा :-

होशियारपुर के पास में हरयाणा एक ग्राम।

वहां की कन्या भगवती जपें प्रभु का नाम।।

जपें प्रभु का नाम, जवानी में वैराग्य समाया ।

काषाय वस्त्र को धार, ज्ञान वेदांत गुरु से पाया।                   

पढ़ सत्यार्थ प्रकाश विचारों में परिवर्तन आया।

भक्ति भव से संग भ्रात के मुंबई कदम बढाया।।                   

पास स्वामी के आई। बात परदे में चलाई।

गाँव तुम वापिस जाओ ।

वहां की नारी जाति को सत का मार्ग दिखलाओ।

वार्ता :- स्वामी जी नारी जाति से वार्तालाप नहीं करते थे फिर भी माई भगवती के हट से परदा डालकर उपदेश दिया और उसे नारी जाति उद्वार हेतु निज वतन को भेज दिया। स्वामी जी मुंबई से पुना को प्रस्थान करते हैं।