31. स्वामी गए अहमदाबाद

31 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- भरूच से स्वामी जी अहमदाबाद के लिए रावण हुए। स्टेशन पर अनेक सज्जनों ने उनका स्वागत किया। एक भाटिया सेठ अपनी गाड़ी में बैठा कर उस राह से ले गया, जहां लाखों रूपया खर्च कर एक मंदिर बनवाया था। उसने स्वामी जी से मंदिर देखने को कहा।

राग धमाल :-

स्वामी गए अहमदाबाद लोग स्वागत को आए हैं।। टेक।।

सेठ भाटिया ने स्वामी को गाड़ी में बैठाया।

लाखों रुपया खर्च किये एक मंदिर बनवाया।।

स्वामी जी ने कहा अविद्या इसको कहते हैं ।

विद्यालय खुलने से ज्ञान के जलते हैं।।

मणिकेश्वर मंदिर में स्वामी जी ठहराए हैं । स्वामी..

राव बहादुर गोपालराव जी भक्ति भाव रखते हैं ।

शास्त्रार्थ के बाद वहां सत्कार हुआ करते हैं ।।

पौष वदी पंचमी को स्वामी राजकोट में आए ।

राजकुमारों को विद्यालय में उपदेश सुनाए ।।

ज्ञान की गंगा बही देखकर सब हरषाए हैं । स्वामी..

वार्ता :- पौष कृष्ण पक्ष संवत ॉ८२ॉ में स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज ने प्रथम आर्य समाज की स्थापना की। लेकिन नियम और उपनियमों के न बनने से कार्य अपूर्ण था।

वीर छन्द :-

आर्य समाज स्थापित कर दी, नर नारी सब मगन भए।

नियम और उपनियम नहीं थे, अधिकारी सब नियम किए।

अहमदाबाद बड़ौदा होकर, स्वामी पहुंच गए बलसाड।

पारसी और मुसलमानों पर, कृपा दृष्टी कीन्ही महाराज।।

वार्ता :- स्वामी जी बलसाड से वसई होकर फिर मुंबई आते हैं ।

लामिनि :-

सोचते विचरते स्वामी मुम्बा नगरी आए हैं।

लालजी दयालजी के बंगले में ठहराए हैं।।

ढोंगी पोप पंडितों के चेहरे कुम्हिलाए हैं।

सत्य के पुजारी अपने मन में अति हरषाए हैं।।

तर्ज बारहमासी :-

सत्य सबके ही मन भावे,

समय बड़ा बलवान बीज से अंकुर उग आवे।

चैत्र का शुक्ल पक्ष भाया,

संवत उन्नीससौं बत्तीस का सुअवसर आया।

देर न कीन्ही पल की है,

गिरगांव मुहल्ले में वाटिका माणिकचंद की है।

आर्य समाज स्थापित कीन्हा,

वैदिक धर्म प्रचार ऋषि ने बीज रोप दीन्हा।

देख जन सबहीं हरषाए,

आर्य जाति के उद्भव के आसार नजर आए।

प्रभु का दयाभाव पावे,

समय बड़ा बलवान बीज से अंकुर उग आवें

बड़ौदा शहर पहुंच गए हैं,

विश्वामित्र के तट पर मंदिर में पहुंच गए हैं।

तर्क के तीर चलाये हैं,

दक्षिण और गुजराती पंडित सब घबडाए हैं।

राज्य का धर्म बताया है,

माधवराव के कहने पर सबको समझाया है।

           विजय का बिगुल बजाय है,

कमलनयन को जीत महा गौरव पड़ पाया है।

ऋषि की महिमा सब गावें,

समय बड़ा बलवान बीज से अंकुर उग आवे।