29. श्रेष्ठ जन आकर कहें

29 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- मुंबई में वल्लभ मत और स्वामी नारायण मत का प्रबल युक्तियों से खंडन किया, इससे प्रभावित कुछ सज्जन लोग स्वामी के पास आकर विनय करने लगे कि कार्य को आगे बढ़ाने के लिए एक सत्संग मंडल बनना चाहिए। उनके नाम करण का स्वामी से निवेदन किया।

छंद :-

श्रेष्ठ जन आकर कहें, एक संघ बनना चाहिए।

क्या नाम हो उस संघ का, ऋषि को बताना चाहिए।।

नयनो को अपने बंदकर, महाराज चिंतन में लगे।

नाम आर्य समाज उत्तम, सोचकर कहने लगे।।

न हो सकी स्थापना, ऋषिराज सूरत जा चुके।

संस्कार विधि लिखवा रहे, सत्यार्थ प्रकाश लिखवा चुके।।