22. पौराणिक मत के झुण्ड

22 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- संवत १९२६ काशी के आनंद उद्यान में तीन सौ पंडितों ने शास्त्रार्थ समर में स्वामी दयानंद को पछाड़ने का संकल्प लिया। साथ में काशी नरेश भी पंडित मंडली के साथ थे। पं. ज्योति स्वरूप जी और श्री जवाहर दास जी स्वामी जी के साथ व्यवस्था में सहायक थे।

कव्वाली राग होलिका :-

पौराणिक मत के झुण्ड में देख खड़ा था ऋषि अकेला।

घंटा और घड़ियाल बज रहे,

बम-बम भोले शंख बज रहे,

काशी के बाजार में। देख खडा..

भांति-भांति के संत पधारे,

ऐसे भी जो पहिले हारे

फंस बैठे तकरार में। देख खडा..

लम्बे चौड़े तिलक लगावे,

अपना अपना ज्ञान बतावे,

जो फसे भंवर के जाल में। देख खडा..

तीन सौ पंडित एक तरफ थे,

काशी पति भी उसी तरफ थे,

पंथाई पंडाल में। देख खडा..   

धर्माधर्म मूर्ति पूजा पर,

इतिहास पुराण कल्म संज्ञा पर,

उलझे थे वाद-विवाद में। देख खडा..

दयानंद की जीत हुई थी,

मत पंथों की हर हुई थी,

जो पड़े कपट जंजाल में। देख खडा..