21. कलक्टर थेन महाशय

21 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- पंडितों के इस असत्य व्यवहार से कानपूर के कलेक्टर थेन महाशय को बड़ा कष्ट हुआ क्योंकि वे शास्त्रार्थ समर के मध्यस्थ थे। शास्त्रार्थ लक्ष्मण शास्त्री और हलकर ओझा के साथ हुआ था।

तोड़ :-

कलक्टर थेन महाशय, मन में रहे अकुलाए।

झूठ की पोल खोल दी, विज्ञापन दिए बढवाए।।

वार्ता :- स्वामी जी के साथ विशेषकर शास्त्रार्थ मूर्ति पूजा पर ही होता था। महाराज चार वेद, चार उपवेद, छः शास्त्र उपांग, दस उपनिषद, कात्यायन सूत्र, योगभाष्य, मनुस्मृति और महाभारत को प्रमाणिक ग्रन्थ मानते थे। कानपूर में श्री हृदय नारायण जी ने स्वामी जी का जी भरकर सत्कार किया। जिस प्रकार सूर्य के प्रकाश से चंद्रमा प्रकाशित होता है उसी प्रकार स्वामी जी की विद्या से हृदय नारायण जी का हृदय प्रकाशित हुआ। कानपूर से स्वामी जी अनेक स्थानों पर विचरण करते कशी पहुंचे।

                     (काशी खंड)

अश्विन वदी प्रतिपदा संवत १९२६ को स्वामी जी काशी में जाकर गंगा की रेती में विश्राम करने लगे। शिव सही जिसने वाल्मिक रामायण पर अशुद्ध टिप्पणी लिखी स्वामी जी के भय से काशी नरेश के पास छिपकर रहने लगा। स्वामी जी ने इसी ओर कूंच किया।

बहर तबील :-

काशी नगरी का महात्म्य प्राचीन है,

ज्ञान गंगा का विस्तार यहां से हुआ।

सभ्यता संस्कृति की प्रचारक यही,

ईश महिमा का गुण ज्ञान यहां पर हुआ।

देश-परदेश में इसकी ख्याति रही,

वेद ज्योति का भू पर उजाला हुआ।

विद्वत्ता में जमी धाक चहुं ओर थी,

रीति-नीति का व्यवहार यहां से हुआ।

तोड़ :-

दीन्ही काशी में ललकार,

होश पंडों के उड़ गए हैं-होश..