19. महिमा कहाँ तक करूं बखान

19 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

चौक रसिया :-

महिमा कहाँ तक करूं बखान।

ऋषि ने कैसी धूम मचाई।

विशुद्धानंद और कृष्णानंद जी शास्त्रार्थ में हार गए।

पंडित राम नारायण जी, फिर अंगद जी के पास गए ।।

अंगद शास्त्री हर मान कर ऋषि को करे प्रणाम।। ऋषि ने..

कन्ठी तोड गले की डाली, प्रतिमा दी जल में दई बहाए ।

सत्य वचन है दयानंद का, शंका रही हृदय में नाए ।।

संत मंडली को सोरों में, दिया वेद का ज्ञान।। ऋषि ने..

कासगंज में जाए ऋषि ने, शिक्षा का उद्धार किया ।

पंडित सुखानंद जी को वहां, अध्यापक का भार दिया ।।

गुरु मरण का सुना संदेशा, तड़फे उनके प्रान।। ऋषि ने..

चिंता न कीन्ही मात-पिता की गुरु की याद सताई है ।

चित्त चन्द्रमा पर राहू की, काली छाया छाई है ।।

सूरज डूब गया विद्या का, मन में दुःख महान।। ऋषि ने..