18. कर्णसिंह से जा कही

18 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- बरौनी के राव कर्णसिंह की कर्णवास में ससुराल थी। वहां उन्होंने रास रचवाया। जिसे देखने के लिए दयानंद जी बुलाने कुछ लोगों को भेजा। इस पर स्वामी जी ने कहा कि महापुरुषों का स्वांग भरना मनुस्मृति में दोष वर्णन है। इस निन्दनीय कार्य में हम कदापि नहीं जायेंगे। लौटकर उन्होंने नमक मिर्च लगाकर कर्णसिंह को स्वामीजी के प्रति भड़काया।

दोहा :-

कर्णसिंह से जा कही स्वामी जी की बात।

सच्चे कडुवे बोल से क्रोध भर गया गात।

वीर छन्द :-

क्रोधित होकर पहुंचे कर्णसिंह स्वामी दयानन्द के द्वार।।

दयानंद उपदेश दे रहे लगा हुआ उनका दरबार।

पास पहुंचकर स्वामी जी को, कर्णसिंह दीन्ही ललकार।।

हमने बुलाया क्यों नहीं आए, क्या अपने को रहे जताए।

कितना घमंड तुमको छाया है, वह मिट्टी में देऊ मिलाए।

कर्णसिंह की देख दशा को, दयानंद दीन्ही फटकार।

महापुरुषों का स्वांग रचाते, ऐसे जीवन को धिक्कार।।

रास-रंग की इस मस्ती ने, देश को दिया गुलाम बनाए।।

छात्र धर्म मर्यादा घट गई, धीर-वीरता दई नशाए।।

कर्णसिंह :-

मैं चेला हूं रंगाचार्य का, साधु सुनले कान लगाए।

ज्यादा जो बकवास करोगे, कर्णवास से देऊ भगाए।।

संयम बिगड़ा कर्णसिंह का, ऋषिवर ने दीन्ही हुंकार।

शस्त्र चलाने की इच्छा हो, जाए लड़ो जयपुर दरबार।।

शास्त्रार्थ गर करना चाहो, रंगाचार्य को लेऊ बुलाए।

उठा विवाद श्री के ऊपर जो मस्तक पर रही दिखाए।।

आग बबूला कर्णसिंह भए, नंगी ली तलवार उठाए ।

बुद्धि भ्रष्ट भाई ठाकुर की, संन्यासी पर दई चलाए।।

वार्ता :- स्वामी दयानंदजी ने संन्यास धर्म का पालन करते हुए, हिंसा का जवाब अहिंसा से किस प्रकार दिया?

कवित्त :-

आतताई जान के कलाई ऋषि थम लीन्ही ।

हाथ से खडग राव महाशय का छीन लियो।।

भूमि पर दबाय उसे तपोबल से तोड़ दी।

टुकड़ा उठायकर दूर-दूर फैक दियो।।

लामिनी :-

ऋषि की देख साधना, राव जी गए घबड़ाए।

लालिमा फीकी पड़ गई, चेहरा गया मुरझाए।।

तुरत ही बैरंग लौटे, गैरत रही दिल पर छाए।

श्रेष्ठ जन निंदा कर रहे, आपस में रहे बतियाए।।

वार्ता :- जिस समय यह घोर घटना घटित हुई उस समय स्वामी जी के पास अन्य संभ्रांत लोगों ने राव महाशय पर अभियोग चलाने की चर्चा की।

तोड़ :-

कर्णसिंह बहुत बुरा किया।

उन पर अभियोग चलाने का प्रस्ताव पास किया।

देखो संन्यासी का धर्म नहीं अभियोग चलाने का।।