162 Ishwar Vishayak Bhrantiyan

ईश्वर विषयक भ्रान्तियाँ

१. ईश्वर स्थानविशेष में रहता है।
२. ईश्वर शरीरधारी है अथवा अवतार लेता है।
३. ईश्वर पापों को क्षमा करता है।
४. ईश्वर बिना ही कर्मों के फल देता है।
५. ईश्वर जो चाहे वह (याने सब कुछ) कर सकता है।
६. संसार में हो कुछ घट रहा है ईश्वर ही कराता है।
७. क्या अपने अन्दर से ईश्वर संसार बनाता है।
८. ईश्वर में इच्छा नहीं है।
९. ईश्वर निराकार एवं साकार भी एक साथ है।
१०. ईश्वर आँखों से दिखाई देता है।
११. जीव ही ईश्वर बन जाता है।
१२. ईश्वर जीव की सारी भविष्य की बातों को जानता है।
१३. ईश्वर की अंश ही जीव है।