141 Dhyan Mahatva 02

ध्यान से लाभ

१. ईश्वर के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन उनके अनन्त कृपाओं के लिए।
२. ईश्वर हमारा परम रक्षक परम हितैषी है इसका अनुभव होते रहना।
३. मन इन्द्रियों पर नियन्त्रण हो जाना।
४. सहनशक्ति बढ़ती है।
५. बुद्धि का विकास होता है इससे ग्रहणक्षमता तथा स्मृतिवृद्धि भी होती है।
६. कर्म निष्काम बनते चले जाते हैं और तीनों एषणाएं कमजोर पड़ते चले जाते हैं।
७. अन्तःकरण में शान्ति, प्रसन्नता, निर्भीकता आदि की प्राप्ति होना।
८. ईश्वर की पवित्रता के अवतरण से कुसंस्कारों का तनुकरण तथा सुसंस्कारों की वृद्धि होती है।
९. आत्मसाक्षात्कार तक मोक्ष तक जीव की उन्नति होती है।