125 Brahm Avhaan Panch Kosh Utthan 02

ब्रह्म आह्वान से चतुः आधान।
अन्न बल वेग व विज्ञान।। टेक।।
उच्च निम्न मध्यम पुकारते हैं ब्रह्म।। 1।।
यात्री व मंझिल करम पुकारते हैं ब्रह्म।। 2।।
संघर्षरत या निवास में पुकारते हैं ब्रह्म।। 3।।
असमृद्ध या समृद्धं पुकारते हैं ब्रह्म।। 4।।
सम ज्ञान सम हृदयं स्वीकारते हैं ब्रह्म।। 5।।

१) अन्नमय कोश : त्वचा से अस्थिपर्यन्त पृथ्वीमय। (अन्न, रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य।)

२) प्राणमय कोश : १. प्राण : भीतर से बाहर, २. अपान : बाहर से भीतर, ३. समान : नाभिस्थ होकर सर्वत्र शरीर में रस पहुंचाता, ४. व्यान : सब शरीर में चेष्टा आदि कर्म, ५. उदान : जिससे कण्ठस्थ अन्नपान खेंचा जाता एवं बल पराक्रम होता।

३) मनोमय कोश : मन, अहंकार, वाक्, पाद, पाणि, पायु, उपस्थ।

४) विज्ञानमय कोश : बुद्धि, चित्त, श्रोत्र, नेत्र, घ्राण, रसना, त्वचा।

५) आनन्दमय कोश : प्रीति-प्रसन्नता, न्यूनानन्द, अधिकानन्द, आनन्द, आधार कारणरूप प्रकृति।