11. पूर्ण शिक्षा हुई शिष्य की

11 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता-स्वामी दयानन्द जी ने ढाई वर्ष गुरु विरजानंद जी के पद पद्मों में बैठकर अष्टाध्यायी महाभाष्य वेदांत सूत्र आदि अनेक ग्रंथों का अध्ययन किया। गुरु सत्संग दयानंद जी के लिए सुवर्ण सुगंधि का योग बन गया। विद्या से भरपूर दयानंद का विचार गुरु आज्ञा लेकर देशाटन

करने का हुआ।

दोहा :-

पूर्ण शिक्षा हुई शिष्य की, गया गुरु के पास।

बिछुड़न के दिन आ गए, मनवा हुआ उदास।।

छन्द :-

थोड़ी सी लेकर लौंग को गुरुदक्षिणा देने लगे।

इसके आलावा कुछ नहीं है यूं विनय करने लगे।।

विरजानंद जी..

वत्स जाओ खुश रहो, कर्तव्य का पालन करो।

इस दीन-हीन परतंत्रता से मुक्त मानव को करो।

मेरी यही गुरुदक्षिणा है बात मानो आज से।

सच्ची कसौटी वेद की जाने न पाए हाथ से।।

तोड़ :-

हरदम रखना प्रभु को यद् धर्म की ज्योति जलना है…….