07. सङ्कल्पपाठः

अथ सङ्कल्पपाठः
ओं तत्सत् श्रीब्रह्मणो द्वितीयप्रहरोत्तरार्द्धे वैवस्वतमन्वन्तरेऽष्टाविंशतितमें कलियुगे कलिप्रथम- चरणेऽमुक….. संवत्सरे, …..अयने, …..ऋतौ, …..मासे, …..पक्षे, …..तिथौ, …..वासरे, …..नक्षत्रे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे आर्यावर्तदेशान्तर्गते …..प्रान्ते, …..जनपदे, …..मण्डले, …..ग्रामे/नगरे, …..आवासे/भवने, मया/अस्माभिः दैनिक अग्निहोत्र-कर्म क्रियते।

कालगणना

सृष्टिसंवत् संधिकाल रहित 1,96,08,53,115 संधिकाल सहित 1,97,29,49,117 (ईश संवत 2015 के हिसाब से)

14 मन्वन्तर :- 1. स्वायम्भुव, 2. स्वरोचिष, 3. औत्तमी, 4. तामस, 5. रैवत, 6. चाक्षुष, 7. वैवस्वत, 8. सावर्णि, 9. दक्षसावर्णि, 10. बृहत्सावर्णि, 11. धर्मसावर्णि, 12. रुद्रपुत्र, 13. रौच्य, 14. भौतव्यक।

71 चतुर्युगियां = एक मन्वन्तर।

सत-युग 17 लाख 28 हजार वर्ष

त्रेतायुग 12 लाख 96 हजार वर्ष

द्वापरयुग 8 लाख 64 हजार वर्ष

कलियुग 4 लाख 32 हजार वर्ष

2 अयन :-

दक्षिणायन 22 जून से 21 दिसम्बर।

उत्तरायण 22 दिसम्बर से 21 जून

6 ऋतुएं :-

ऋतुएं     चान्द्रमास              सौरमास

वसन्त     चैत्र-वैशाख             मधु-माधव

ग्रीष्म     ज्येष्ठ-आषाढ           शुक्र-शुचि

वर्षा       श्रावण-भाद्रपद           नभस्-नभस्य

शरद      आश्विन-कार्तिक         ईष-ऊर्ज

हेमन्त     मार्गशीर्ष-पौष           तपस्-तपस्य शिशिर  माघ-फाल्गुन   सहस्-सहस्य