062 Bhaga Pranetar Bhaga

मूल प्रार्थना

भग॒ प्रणे॑त॒र्भग॒ सत्य॑राधो॒ भगे॒मां धिय॒मुद॑वा॒ दद॑न्नः।

भग॒ प्र नो॑ जनय॒ गोभि॒रश्वै॒र्भग॒ प्र नृभि॑नृ॒र्वन्तः॑ स्याम॥११॥यजु॰ ३४।३६

व्याख्यानहे भगवन्! परमैश्वर्यवन्! “भग ऐश्वर्य के दाता संसार वा परमार्थ में आप ही हो तथा “भग प्रणेतः आपके ही स्वाधीन सकल ऐश्वर्य है, अन्य किसी के आधीन नहीं। आप जिसको चाहो उसको ऐश्वर्य देओ सो आप कृपा से हम लोगों का दारिद्र्य छेदन करके हमको परमैश्वर्यवाले करें, क्योंकि ऐश्वर्य के प्रेरक आप ही हो। हे “सत्यराधः भगवन्! सत्यैश्वर्य की सिद्धि करनेवाले आप ही हो, सो आप नित्य ऐश्वर्य हमको दीजिए जो मोक्ष कहाता है उस सत्य ऐश्वर्य का दाता आपसे भिन्न कोई भी नहीं है। हे सत्यभग! पूर्ण ऐश्वर्य, सर्वोत्तम बुद्धि हमको आप दीजिए, जिससे हम लोग आप, आपके गुण और आपकी आज्ञा का अनुष्ठान,  ज्ञान, इनको यथावत् प्राप्त हों। सो हमको सत्यबुद्धि, सत्यकर्म और सत्यगुणों को “उदव (उद्गमय प्रापय) प्राप्त कर, जिससे हम लोग सूक्ष्म से भी सूक्ष्म पदार्थों को यथावत् जानें “भग प्र नो जनय हे सर्वैश्वर्योत्पादक! हमारे लिए “भगः ऐश्वर्य को अच्छी प्रकार से उत्पन्न कर। सर्वोत्तम गाय, घोड़े और मनुष्य इनसे सहित अनुत्तम ऐश्वर्य हमको सदा के लिए दीजिए। हे सर्वशक्तिमन्! आपकी कृपाकटाक्ष से सब दिन हम लोग उत्तम-उत्तम पुरुष, स्त्री और सन्तान भृत्यवाले हों। आपसे हमारी अधिक यही प्रार्थना है कि कोई मनुष्य हममें दुष्ट और मूर्ख न रहे तथा न पैदा हो, जिससे हम लोगों की सर्वत्र सत्कीर्ति हो और निन्दा कभी न हो॥११॥