05. नेत्र कर्ण

अथ अङ्गस्पर्श-मन्त्राः

ओं वाङ्म आस्ये ऽ स्तु। इस मन्त्र से मुख

ओं नसोर्मे प्राणो ऽ स्तु।इस मन्त्र से नासिका के दोनों छिद्र

ओं अक्ष्णोर्मे चक्षुरस्तु।इस मन्त्र से दोनों आंख

ओं कर्णयोर्मे श्रोत्रमस्तु। इस मन्त्र से दोनों कान

ओं बाह्नोर्मे बलमस्तु।इस मन्त्र से दोनों बाहु

ओम् ऊर्वोर्म ओजो ऽ स्तु। इस मन्त्र से दोनों जंघा

ओम् अरिष्टानि मे ऽ ङ्गानि तनूस्तन्वा मे सह सन्तु।इस मन्त्र से दाहिने हाथ से जल स्पर्श करके मार्जन करना।