03. तभी एक घटना घट गई

3 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

राग धमाल :-

तभी एक घटना घट गई, शिव जी के मंदिर में।

अरे! एक चूहा निकला, शिव जी के मंदिर में।।

चूहा शिव पिंडी पर आया। पूजा का सामान गिराया।

उछल कूद उत्पात मचाया। शिव शंकर को खुब सताया।

अरे! मन बिजली कौंधी, शिवजी के मंदिर में। अरे! एक..

दृष्य देख बालक चकराया। कैसा प्रभु का दर्शन पाया।

तुच्छ जीव नहीं जाए भगाया। चूहे ने शिव को धमकाया।

हृदय में शंका उपजी, शिव के मंदिर में। अरे! एक..

वार्ता :- बालक मूल जी मन ही मन विचार करता है कि शिव कथा में तो शिव जी की अपार महिमा है, लेकिन ये शिव कैसा ?

लामिनी तोड़ :-

मैंने सुना त्रिशूल चलाकर दैत्यों का संहार किया है।

देकर के वरदान एक दिन भस्मासुर को अमर किया है।।

नंदी बैल पर चढ़कर धावे। डमरू का संगीत सुनाए।

भांग धतूरा भोजन खावे। लाल-लाल आँखें चमकाए।

ऐसे बलकारी शंकर का चूहे ने बेहाल किया। देकर के वरदान..

सोए तात को जगा दिया है। सब कुछ उनको बता दिया है।

पत्थर को भगवान बताकर। सबको मुरख बना दिया है।

उस शंकर की खोज करुंगा, जिसने हमें निहाल किया है। देकर के वरदान..

दोहा :-

पत्थर की ये मूर्ति हो न सके भगवान।

चूहे के अपराध को ये न सकी पहचान।

शिव शंकर का रूप है ये मूर्ति पाषान।

तू इसको धिक्कारता ओ बालक नादान।

वीर छंद :-

क्रोधित देख पिता अपने को, बालक घर को आया है।

जो कुछ घटना घटी रात्रि को, माता को बतलाया है।

देख पुत्र की दशा मात ने, जी भर गले लगाया है।

मैं समझाऊं तेरे पिता को, क्यों दिल में घबड़ाया है।।

तोड़ :-

मेरे बेटा रे, मन में भरम अब मत करियो,

तेरे उम्र अभी नादान। मेरे बेटा रे..