025 Shan No Bhagah

मूल प्रार्थना

शं नो॒ भगः॒ शमु॑ नः॒ शंसो॑ अस्तु॒ शं नः॒ पुर॑न्धिः॒ शमु॑ सन्तु॒ रायः॑।

शं नः॑ स॒त्यस्य॑ सु॒यम॑स्य॒ शंसः॒ शं नो॑ अय॒र्मा पु॑रुजा॒तो अ॑स्तु॥२५॥ऋ॰ ५।३।२८।२

व्याख्यानहे ईश्वर! “भगः आप और आपका दिया हुआ ऐश्वर्य “शं नः हमारे लिए सुखकारक हो और “शमु, नः, शंसो अस्तु आपकी कृपा से हमारी सुखकारक प्रशंसा सदैव हो। “पुरन्धिः, शमु, सन्तु, रायः संसार के धारण करनेवाले आप तथा वायु, प्राण और सब धन आपकी कृपा से आनन्दायक हों। “शन्नः, सत्यस्य सुयमस्य शंसः सत्य, यथार्थ धर्म, सुसंयम और जितेन्द्रियादिलक्षणयुक्त की जो प्रशंसा (पुण्यस्तुति) सब संसार में प्रसिद्ध है वह परमानन्द और शान्तियुक्त हमारे लिए हो। “शं नो, अर्यमा न्यायकारी आप “पुरुजातः अनन्तसामर्थ्ययुक्त हमारे कल्याणकारक होओ॥२५॥