02. नगर मौरवी के निकट

2 श्रीमद्दयानन्द काव्यप्रकाश

रचनाकार : ओम प्रकाश आर्य

स्वर : ब्र. अरुणकुमार ”आर्यवीर

ध्वनिमुद्रण : स्वरदर्पण साऊण्ड स्टूडियो (जबलपुर)

वार्ता :- स्वामी दयानन्द जी का जन्म संवत १८८१ में गुर्जर प्रदेश के काठियावाड़ प्रान्त के मौरवी राज्य के टंकारा ग्राम में औदिच्य ब्राह्मण कुल में करसन जी के घर बालक मूल शंकर के रूप में हुआ।

दोहा :-

नगर मौरवी के निकट टंकारा एक ग्राम।

गुर्जर प्रान्त में जन्म लिया था दयानंद बलधाम।।

चौपाई :-

दयानंद बल धाम पिता श्री करसन दास तिवारी।

सुख संपति की कमी न घर में फूल रही फुलवारी।।

धर्म कर्म में लीन बन्धुजन पुलकित थे नरनारी।

बचपन में ही पढ़ा वेद वो बना धर्म अधिकारी।।

उम्र चौदह की पाई है। रात्रि शिवतेरस आई है।

पिताजी यूं समझाए

शिवरात्रि के व्रत से प्राणी परम धाम को जाए।

लामिनी :-

सुनत पिता के वचन मूल जी, मन अपने हरषाए हैं।

रात्रि होत ही संग तात के, शिव मंदिर में आए हैं।।

शिव पुराण की कथा पुजारी, सबको रहा सुनाई है।

आधी रात के बाद सभी पर, निद्रा देवी छाई है।।

परन्तु मूल जी के मन मंदिर में उस रात रवानी थी।

प्रभु के दर्शन करूं हृदय में ऐसी अमित निशानी थी।।

वार्ता :- बालक मूल शंकर के निर्मल हृदय पटल पर प्रभु दर्शन की गहरी लगन थी।

गझल कव्वाली :-

जिसको लगन प्रभु नाम की पागल वाही होता।

अपने प्रभु की याद को पलभर नहीं खोता।।

हरदम तड़फ दिल में रहे प्रीतम के नाम की,

जब तलक उस ईश का दर्शन नहीं होता। जिसको..

लेकर मानव जन्म जो उसको नहीं जाना,

उस मनुज का जीवन किसी लायक नहीं होता । जिसको..

सब सो गए मंदिर में ईश्वर नहीं दीखता,

पानी के छींटे मारकर, बालक नहीं सोता। जिसको..