३७- जेते नभ तारे हैं

३७- जेते नभ तारे हैं

दलित तारक सारे समाज के सुधारक।

आर्य नारी उद्धारक अनाथ उबारे हैं।।

थापे आर्य शिक्षण के केते-केते गुरुकुल।

जाति-पाती, जड़ रूढी-बंधन बिदारे हैं।।

स्वराज स्वदेशी प्रेमी परं देशभक्त तूने।

सर्वांग समाज के प्रदीप्त कर डारे हैं।।

काराणी कहत गुण गिनती करी न जात।

एते उपकार तेरे जेते नभ-तारे हैं।।३७।।

~ दयानन्द बावनी
स्वर : ब्र. अरुणकुमार “आर्यवीर”
ध्वनि मुद्रण : कपिल गुप्ता, मुंबई