जग को आर्य बनाना है

उठो जवानों करो प्रतिज्ञा जग को आर्य बनाना है।
भूले भटके भ्रान्त पथिक को फिर सन्मार्ग दिखाना है।। टेक।।

मतवादों का अन्ध कुहाँसा दिशाबोध भूला मानव।
वैदिक सूर्य विभा चमकाकर निज कर्तव्य निभाना है।
मत पन्थों की पगडंडी में उलझ रहा मनुपुत्र सखे।
वैदिक राजमार्ग पर लाकर लक्ष्य सिद्धि तक लाना है।। 1।।

एक उपास्य ओ3म् हम सबका आर्य नाम अति प्यारा है।
गायत्री गुरुमन्त्र नमस्ते अभिवादन बतलाना है।
धर्म ग्रन्थ हैं वेद हमारा वैदिक धर्म सनातन है।
भाषा संस्कृत एक एकता सप्तक यह सिखलाना है।। 2।।

जीवन को उन्नत बना कर ज्ञान मार्ग अपनाना है।
संध्या हवन सिखाकर सबको ईश्वरभक्त बनाना है।
एक पिता के पुत्र सभी हैं हम समान भाई भाई।
सुख-दुःख मिलकर बाँटे सारें यों जग स्वर्ग बनाना है।। 3।।