ओऽम् बोलो ओऽम्

ओऽम् बोलो ओऽम् साथी यहां कौन?

हर सुबह शाम जप लो ओऽम् नाम।। टेक।।

ओऽम् है सबसे बड़ा, उसने जगत है रचा।

नाम है ये निज का, भापा बोले ओऽम्।। 1।।

ओऽम् की महिमा बड़ी, उससे है धरती खड़ी।

उसने सजाई तारों की लड़ी, सब बोलें ओऽम्।। 2।।

ओऽम् है निराकार, सबका है वो आधार।

वो ही है जीवनसार, रचो विरचो ओऽम्।। 3।।

ओऽम् उसका निज नाम, ये ही है परमधाम।

हर पल ओऽम्, हर क्षण ओऽम्।। 4।।