०५१ स. प्र. कवितामृत चतुर्थ समुल्लास (०२)

चतुर्थ समुल्लासःभाग (०२) विवाह का समय और विधि दोहा       कन्या षोडश वर्ष से, चौबीस वर्ष पर्यन्त।       पच्चिस से अड़तालिस पर, ब्याहे वर उपरंत।। चौपाई       जुगल जोड़ी चौबीस अड़ताली,…

०५० स. प्र. कवितामृत चतुर्थ समुल्लास (०१)

चतुर्थ समुल्लासः भाग (०१)       अथ समावर्त्तनविवाहगृहाश्रमविधिं वक्ष्यामः।       वेदानधीत्य वेदौ वा वेदं वापि यथाक्रमम्।       अविप्लुतब्रह्मचर्यो गृहस्थाश्रममाविशेत्।।१।।       तं प्रतीतं स्वधर्मेण ब्रह्मदायहरं पितुः।            स्त्रग्विणं तल्प आसीनमर्हयेत्प्रथमं गवा।।२।।       गुरुणानुमतः…

०४९ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२७)

तृतीय समुल्लास भाग (२७) चौपाई             पुरुष पठित अरु अनपढ़ नारी, किस विधि दोनों हों सहचारी।             घर मह होवे नित्य लड़ाई, सुख सम्पति सब दूर नशाई।             किमि अनपढ़…

०४८ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२६)

तृतीय समुल्लास भाग (२६) प्रश्न स्त्रीशूद्रौ नाधीयातामिति श्रुतेः             कहिये प्रभु्! शुद्र अरु नारी, वेद पठन के हैं अधिकारी।             जो यह वेद पठन मँह लागे, तो ब्राह्मण क्या करहिं…

०४७ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२५)

तृतीय समुल्लास भाग (२५) अथ विद्या पठन पाठन के विघन             पठन काल मंह विघ्न जो आवें, उन्हें दूर कर पढ़ें पढ़ावें।             विषयी लंपट दुष्ट कुसंगा, इन को त्याग…

०४६ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२४)

तृतीय समुल्लास भाग (२४) प्रश्न             क्या इन मंह कुछ भी सच नाहीं, केवल झूठ भरा इन माँही।             मानत नाहीं आप पुराना, सब इतिहास और उपखाना।             यह पुराण…

०४५ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२३)

तृतीय समुल्लास भाग (२३) चौपाई             ऋषि मुनि रहे बड़े विद्वाना, धर्मातम अरु हृदय महाना।             पक्षपात मन मांहि न राखें, गुप्त न राखें सूनृत भाखें।             उनके ग्रन्थ परम…

०४४ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२२)

तृतीय समुल्लास भाग (२२) स्थाणुरयं भारहारः किलाभूदधीत्य वेदं न विंजानाति योऽथम्। योऽथज्ञ इत्सकल भद्रमश्नुते नाकमेति ज्ञानविधूतपाप्मा।। – निरुक्त १ । १८ चौपाई             वेद पढ़े पर अर्थ न जानहि, भारहार…

०४३ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२१)

तृतीय समुल्लास भाग (२१) कुण्डलिया सारस्वत अरु चन्द्रिका, ग्रंथ सभी जंजाल। यह कौमुदी मनोरमा, पढ़त पचासों साल।। पढ़त पचासों साल जाल क्या व्यर्थ फैलाया। खोदा बड़ा पहाड़ निकल इक मूषक…

०४२ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (२०)

तृतीय समुल्लास भाग (२०) पढ़ने पढ़ाने की विधि दोहा प्रथम पाणिनि मुनि की, ‘शिक्षा’ कंठ कराय।      स्थान यत्न अक्षरन के, विधि सों दे बतलाय।। चौपाई जिमि पकार को ओष्ठ स्थाना,…

०४१ स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (१९)

तृतीय समुल्लास भाग (१९) इन्द्रियदोषात्संस्कारदोषाच्चाविद्या।। – वै० अ० १ । आ० २ । सू० १० ।। दोहा इन्द्रिय अरु संस्कार का, होवहि दोष महान। होय अविद्या उत्पति, यह दूषित अज्ञान।…

०४० स. प्र. कवितामृत तृतीय समुल्लास (१८)

तृतीय समुल्लास भाग (१८) अणुमहदिति तस्मिन्विशेषभावाद्विशेषाभावाच्च।। – वै० अ० ७ । आ० १ । सू० ११।। बड़ा ‘महत्’ ‘अणु’ सूक्ष्म जाने, अणु महत् का भेद पछाने। जिमि त्रिसरेणु लीख सों…

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