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Audio Tag: Satyarth Prakash Kavita Edited

०११ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (८)

प्रथम समुल्लास भाग (९) ‘चदि’ आल्हादे ‘चंद्र हु सिद्धि, चंद्र शब्द की अर्थ प्रसिद्धि। सुख दाता आनन्द सरूपा, चन्द्र नाम परमेश अनूपा।   ‘मगि’ गत्यर्थे मंगल नामा, मंगलकारक वह भगवाना। ‘बुध्’ [ … ]

०१० सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (७)

प्रथम समुल्लास भाग (७) प्रश्न संज्ञा ‘मित्र’ सखा को कहिये, ईश अर्थ मंह क्यों पुन गहिये। इन्द्रादिक देवन के कर्मा, जग विख्यात सबहुं के धर्मा। ग्रहण करें साधारण अर्था, ईश [ … ]

००९ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (६)

प्रथम समुल्लास भाग (६) स्तुति प्रशंसा और उपासन, प्रभु के करें भक्त थित आसन। जिंह उत्तम गुण कर्म स्वभावा, तिंह पर उपजे श्रद्धा भावा।। पारब्रह्म सर्वोत्तम ईश्वर, सब सों ऊँचा [ … ]

००८ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (५)

प्रथम समुल्लास भाग (५) ओंकार अर्थ का विचार चौपाई ‘राट’ ‘वि’ उपसर्ग समीपे, चमक दमक धात्वर्थ प्रदीपे। ‘क्विप्’ प्रत्यय पुन साथ लगायें, एहि विधि शब्द विराट् बनायें।। विविध जगत् प्रभु [ … ]

००७ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (४)

प्रथम समुल्लास भाग (४) सोरठा इक केवल ओंकार, ईश्वर का निज नाम है। जाप करे संसार, जन्म मरण बंधन कटे।। चौपाई शेष नाम मँह लखें प्रकरना, पुन इनके अर्थों को [ … ]

००६ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (३)

प्रथम समुल्लास भाग (३) सब से बड़ा महाप्रभु मेरा, ब्रह्म नाम ताते प्रभु केरा। ओ३म् नाम ताका है भाई, अविनाशी, नहीं वह बिनसाई।। उसका सकल विश्व पर शासन, सिमरहु वाको [ … ]

००५ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (२)

प्रथम समुल्लास भाग (२) ओं खम्ब्रह्मं।।१।। – यजुर्वेद अध्याय ४०। मन्त्र १७ ओमित्येतदक्षरमुद्रीथमुपासीत।।२।। – छान्दोग्य उपनिषत्। ओमित्येतक्षरमिदं सर्वं तस्योपव्याख्यानम्।।३।।     – माण्डूक्य। सर्वें वेदा यत्पदमामनन्ति तपांसि सर्वाणि च यद्वदन्ति। यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं [ … ]

००४ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास (१)

ओ३म् सच्चिदानन्देश्वराय नमो नमः सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत प्रथम समुल्लास भाग (१) ओ३म् शन्नो मित्रः शं वरुणः शन्नो भवत्वर्यमा। शन्नऽइन्द्रो बृहस्पतिः शन्नो विष्णुरुरुक्रमः।। नमो ब्रह्मणे नमस्ते वायो त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि। त्वामेव [ … ]

००३ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत भूमिका भाग (२)

सत्यार्थ प्रकाश भूमिका भाग (२) प्रश्न महाराज इक संशय भारी, यह शंका मम करो निवारी। ग्रन्थारम्भ आपने कीना, प्रथम मंगलाचरण न दीना। ग्रन्थकार हौं देखे जेते, मंगलचार लिखें सब तेते। [ … ]

००२ सत्यार्थ प्रकाश कवितामृत भूमिका भाग (१)

ओ३म् सच्चिदानन्देश्वराय नमो नमः सत्यार्थ प्रकाश भूमिका भाग (१) दोहा सत्य अर्थ प्रकाश हित, या सत्यार्थ प्रकाश। जगे जोति नित सत्य की, झूठ तिमिर का नाश।। चौपाई सदा सत्य को [ … ]

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