ब्रह्म युजित उन्मुक्त तू हो जा

(तर्ज :- दर्शन दो घनश्याम) ब्रह्म युजित उन्मुक्त तू हो जा धरती वासी रे।। टेक।। देश देश ना सीमा तेरी, ब्रह्माण्ड रागमय वीणा तेरी।फैल बिखर जा अन्तस्वासी, दिव्य आकाशी रे।।…

आर्य वीर दल रहा रहेगा प्राण आर्यों का

आर्य वीर दल रहा रहेगा प्राण आर्यों का।इससे ही होना है नव निर्माण आर्यों का।। टेक।। गुरुवर दयानन्द का इससे गहरा नाता है।आर्यवीर दल पुनः जागरण शंख बजाता है।।लेखराम का…

और किसका मैं पकडुँ सहारा

और किसका मैं पकडुँ सहारा।स्वामी तेरे सिवा कोई नहीं है।। टेक।। जिन्दगी को मैं खोता रहा यूँ।गफलत में मैं सोता रहा यूँ।कितनी गुजरी हैं दिन और रातें।नीन्द आँखों से धोयी…