संगच्छध्वं संवदध्वम्

संगठन सूक्तम् संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। देवा भागां यथा पूर्वे संजानाना उपासते।। समानी व आकूतिः समाना हृदयानि वः। समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति।। समानो मन्त्रः समितिः समानी…

मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको

द्यौः शान्तिरन्तरिक्ष शान्तिः पृथिवी शान्तिरापः शान्तिरोषधयः शान्तिः। वनस्पतयः शान्तिर्विश्वेदेवाः शान्तिर्ब्रह्म शान्तिः सर्व शान्तिः शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि।। 18।। (यजु.36/17) मिले शान्ति वह प्रभुवर हमको।। टेक।। जो रवि किरणों में…

तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु

तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु हों विमल संकल्प मेरे उस सतत गतिशील मन के। हा शिवम् संकल्प मेरे उस सतत गतिशील मन के।। टेक।। ओ3म् यज्जाग्रतो दूरमुदैति दैवं तदु सुप्तस्य तथैवैति। दूरङ्गमं…

कृण्वन्तो विश्वमार्यम्

ध्येय गीत (प्रातःयज्ञ के समय) ओ३म् इन्द्रं वर्धन्तो अप्तुरः कृण्वन्तो विश्वमार्यम्। अपघ्नन्तो अराव्णः।। (ऋग्वेद ९/६३/५) हे प्रभो! हम तुम से वर पाएँ। सकल विश्व को आर्य बनाएँ।। फैलें सुख सम्पत्ति…