अति आत्म या एकी साधना (संक्षिप्त प्रारूप)

स्थिरं सुखम् आसनम्।।१।। स्व आकलन।।२।। त्रि दीर्घ सम विपश्यना।।३।। दीर्घ समगति ‘‘अगाओ’’ उच्चारण।।४।। सुचालनम्।।५।। पादयोः ऊर्वोः बाहुभ्यां यशोबलम् करतलकरपृष्ठे सुचालनम्।।५।। सुस्थिरम्।।६।। नाभिः हृदयम् कण्ठः शिरः सुस्थिरम्।।६।। नवद्वारम्।।७।। पायु उपायु मुख…

म.दयानन्द निर्दिष्ट कर्मकाण्ड-साधना परक मन्त्रार्थ

ईश्वरस्तुतिप्रार्थनोपासना ओ३म् विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव। यद् भद्रन्तन्न ऽ आसुव।। १।। (यजु.अ.३०/मं.३) १) शुद्ध सविता सम्पूर्ण दुःखम् (दुर्गुणों से) सदा दूर कर, भद्र सुखं चारों दिशाओं प्राप्त हो। हिरण्यगर्भः…

‘‘भगवाकरण’’ या ‘‘भगवा प्रबंधन’’

‘‘भगवाकरण शब्द के इर्द-गिर्द भारतीय राजनीति घूम रही है। इस राजनीति में दोनों पक्ष भगवाकरण शब्द को नकार रहे हैं । कांग्रेस, कम्युनिस्ट, बसपा, सपा आदि को भगवा शब्द से…

“सर्वधर्म समभाव-सबको सन्मति दे भगवान”

“हम न केवल विश्व व्यापी सहिष्णुता में विश्वास रखते हैं बल्कि सभी धर्मों को सत्य मानते हैं ।” विवेकानन्द के शिकागों में पहले भाषण का यह अंश सर्व धर्म समभाव…

ज्ञानविज्ञान का आदिमूल

सत्य विद्या और इससे ज्ञात पदार्थ विद्या का आदि मूल परमेश्वर है। अणोरणीयान- अर्थात् सूक्ष्म से सूक्ष्मतम- भौतिक विज्ञान का, महतो महीयान- अर्थात् महान से महानतम अन्तरिक्ष विज्ञान का, यजन-…

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