१८ जि जये

18. जि जये (जयः – उत्कर्षप्राप्तिः), भ्वादिगण 378, अनिट्, परस्मैपदी, अकर्मक

लट् (वर्तमान काल)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जयति    जयतः    जयन्ति

म.पु.     जयसि    जयथः    जयथ

उ.पु.     जयामि   जयावः   जयामः

लिट् (परोक्ष भूत)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जिगाय   जिग्यतुः  जिग्युः

म.पु.     जिगयिथ/जिगेथ     जिग्यथुः  जिग्य

उ.पु.     जिगाय/जिगय      जिग्यिव  जिग्यिम

लुट् (अनद्यतन भविष्यत्)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जेता     जेतारौ    जेतारः

म.पु.     जेतासि   जेतास्थः  जेतास्थ

उ.पु.     जेतास्मि  जेतास्वः  जेतास्मः

लृट् (भविष्यत्)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जेष्यति   जेष्यतः   जेष्यन्ति

म.पु.     जेष्यसि   जेष्यथः   जेष्यथ

उ.पु.     जेष्यामि  जेष्यावः  जेष्यामः

लेट् (वेद)

प्र.पु.     एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

सिप् णित्-पक्ष

(अट्/आट्) (अट्/आट्) (अट्/आट्)

जैषति/जैषाति      जैषतः/जैषातः      जैषन्ति/जैषान्ति

जैषत्/जैषात्               जैषन्/जैषान्

जैषद्/जैषाद्

सिप् अणित्-पक्ष

जेषति/जेषाति      जेषतः/जेषातः      जेषन्ति/जेषान्ति

जेषत्/जेषात्               जेषन्/जेषान्

जेषद्/जेषाद्

सिप् अभाव-पक्ष

जयति/जयाति      जयतः/जयातः      जयन्ति/जयान्ति

जयत्/जयात्               जयन्/जयान्

जयद्/जयाद्

म.पु.             सिप् णित्-पक्ष

जैषसि/जैषासि      जैषथः/जैषाथः      जैषथ/जैषाथ

जैषः/जैषाः

सिप् अणित्-पक्ष

जेषसि/जेषासि      जेषथः/जेषाथः      जेषथ/जेषाथ

जेषः/जेषाः

सिप्-अभाव-पक्ष

जयसि/जयासि      जयथः/जयाथः      जयथ/जयाथः

जयः/जयाः

उ.पु.             सिप् णित्-पक्ष

जैषमि/जैषामि      जैषवः/जैषावः      जैषमः/जैषामः

जैषम्/जैषाम्       जैषव/जैषाव       जैषम/जैषाम

सिप् अणित्-पक्ष

जेषमि/जेषामि      जेषवः/जेषावः      जेषमः/जेषामः

जेषम्/जेषाम्       जेषव/जेषाव       जेषम/जेषाम

सिप्-अभाव-पक्ष

जयमि/जयामि      जयवः/जयावः      जयमः/जयामः

जयम्/जयाम्       जयव/जयाव       जयम/जयाम

लोट् (आज्ञा अर्थ)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जयतु/जयतात्      जयताम्  जयन्तु

म.पु.     जय/जयतात्       जयतम्   जयत

उ.पु.     जयानि   जयाव    जयाम

लङ् (अनद्यतन भूतकाल)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     अजयत्   अजयताम् अजयन्

म.पु.     अजयः   अजयतम् अजयत

उ.पु.     अजयम्   अजयाव  अजयाम

विधिलिङ् (आज्ञा या चाहिए अर्थ)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जयेत्    जयेताम्  जयेयुः

म.पु.     जयेः     जयेतम्   जयेत

उ.पु.     जयेयम्   जयेव    जयेम

आशीर्लिङ् (आशीर्वाद)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     जीयात्   जीयास्ताम् जीयासुः

म.पु.     जीयाः    जीयास्तम् जीयास्त

उ.पु.     जीयासम्  जीयास्व  जीयास्म

लुङ् (सामान्यभूत)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     अजैषीत्  अजैष्टाम् अजैषुः

म.पु.     अजैषीः   अजैष्टम्  अजैष्ट

उ.पु.     अजैषम्   अजैष्व   अजैष्म

लृङ् (हेतुहेतुमद् भविष्यत्)

एकवचन  द्विवचन  बहुवचन

प्र.पु.     अजेष्यत्  अजेष्यताम्        अजेष्यन्

म.पु.     अजेष्यः   अजेष्यतम् अजेष्यत

उ.पु.     अजेष्यम्  अजेष्याव अजेष्याम

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